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तज़क़िरा ए औलिया ए हिन्द

तार्रुफ़ --मोअल्लिफ

अज़क़लम

मौलाना इश्तियाक अहमद क़ादरी

(प्रिंसिपल - मदरसा शैखुल आलम साबरिया चिश्तिया, लखनऊ)

मुल्क भारत के सूबा उत्तर प्रदेश के जिला बाराबंकी के गाँव बेलखरा में सैयद सालिम अलवी की विलादत 23 जून, 1999 ईस्वी को हुई थी । इब्तिदाई तालीम गाँव के ही मदरसे से हासिल की, उसके बाद दुनियावी तालीम के लिए मदरसा इशा अतुल इंटर कॉलेज से हासिल की, जहां से मैट्रिक पास किया। बचपन से ही सालिम अलवी का ज़हन बेशुमार अदबी और मज़हबी किताबें पढ़ने का हुआ करता था। अपनी उम्र के बच्चो से अलग हट कर उन्होंने अपनी ज़िंदग के मक्सद को समझा और अपने ख़ुद के बनाए हुए उसूलों पर अमल पैरा भी हुए। दुनिया को बारीकी समझ से परखने वाले सालिम अल्वी ने दुनियावी तालीम जारी रखी और धीरे-धीरे समाज मे फैली बुराइयों को लेकर उन्होंने अपनी क़लम का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया जिसका असर आज बड़े पैमाने पर दिखाई पड़ रहा है।

नसब

आप अलवी सैयद हैं, आप का नसब 18 वास्तों से मर्द-ए-मुजाहिद शहीद-ए-राहे-हक़ हज़रत सैयद सालार सैफुद्दीन सुखरू गाज़ी रहमतुल्लाह अलैह से होता हुआ इमाम मुहम्मद बिन हनफिया रज़ियल्लाहु अन्हु और मौलाए कायनात ताजदारे हल अता फ़ातहै ख़ैबर बाबुल इल्म मौला अली करमल्लाहु वज्डुल करीम से मिलता है, अक्सर कहावतों में कहा गया है कि होनहार बिरवान के होते चिकने पात | बाबुल इल्म के घराने का कोई बच्चा हो और उसका ज़र्फ़ आला न हो तो शायद ही मुमकिन हो ।

तज़क़िरा ए औलिया ए हिन्द

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  • Syed Salim Alvi

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