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समसारा | Samsara

कुछ शब्दों के माध्यम से अपने भाव प्रकट किए हैं । इन लयबद्ध कविताओं की कोई शैली नहीं है । ये मन के भाव श्री माधव सरकार रघुनंदन के चरणों में समर्पित है ।जो आप तक शब्दों के माध्यम से पहुंच रहे हैं । भक्ति कसे की जाये , ये मैं नहीं जानता , पर जो जानता हूं । जिस पल आपको याद कर लिया जाए वही सबसे अच्छा पल है और समसारा के माध्यम से मैंने वो पल जो आपके साथ महसूस किए हैं । जहां कहीं जब कहीं जो पल आपके साथ बिताए । उनको इन पन्नों में उतार दिया । समसारा कोई क्रमबद्ध सिलसिला नहीं है ।  भावनाओं का अभिव्यक्ति है।
 मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ, इस  सफ़र में मेरे साथ चलें। 
जीतेन्द्र सिंह राठौर 

कोई पुष्प चढ़ाएं ,  कोई चढ़ाई चंदन
राठौड़ लाया मन के भाव , और मैं क्या चढ़ाऊं रघुनंदन

समसारा | Samsara

SKU: IOK77
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  • Jitendra Singh Rathore

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